
मोहनपुर प्रखंड में पांच प्रतिशत ही विधालय में बच्चो को मिल रहा है अण्डा
मोहनपुर एमडीएम प्रभारी ने माना की बच्चों को अंडा नहीं दिए जाने पर प्रधानाध्यापक कर रहे हैं मनमानी
संवाददाता रामानंद सिंह
मोहनपुर, गया
गया जिला के मोहनपुर प्रखंड अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों में मध्यान भोजन में भारी अनियमितता बरती जा रही है। प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश विद्यालयों में शुक्रवार को भोजन के साथ दिए जाने वाला अंडा बच्चों के थाली से गायब रहा। दैनिक जागरण के द्वारा शुक्रवार को बच्चों के थाली में अंडे का पडताल किया। मौके पर पाया कि प्रखंड के अधिकांश विद्यालयों में अंडा की जगह बच्चों को केला पर ही संतुष्ट होना पड़ रहा है। प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय बुमुआर में बच्चों को खाने के समय जब पूछा गया तो बच्चों ने एक स्वर में जवाब दिया कि हम लोग को केला नहीं अंडा चाहिए बच्चों को केला पर ही संतोष करना पड़ा। वहीं विद्यालय से बाहर खड़े अभिभावकों ने बताया कि पिछले कई महीने से अंडा नहीं मिल रहा है। सिर्फ और सिर्फ केला ही मिलता है। अभिभावक ने कहा कि सरकार के द्वारा जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है। एक तरफ सरकार अंडा देने की बात कहती है लेकिन शिक्षक इस बात को नकारते रहते हैं और वह फल के बहाना ढूंढ कर सिर्फ सस्ती फल के नाम पर बच्चा को एक-एक दे देते हैं। इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय बाजू कला हरिजन में सहायक शिक्षक निलेश कुमार बच्चों को पढ़ा रहे थे। विद्यालय में रसोईया से पूछा तो उन्होंने कहा कि चावल छोले बनाए जा रहा है। अंडा के जगह पर प्रभारी केला लाने के लिए बाजार गए हैं। प्राथमिक विद्यालय शांति नगर में चार शिक्षक में तीन शिक्षक उपस्थित थे। प्रभारी रंजू कुमारी ने बताया कि 44 बच्चा का नामांकित है। लेकिन विद्यालय में एक भी बच्चा उपस्थित नहीं था। रसोईया छूटी पर थी। मध्य विद्यालय बुमुआर में प्रभारी रीना कुमारी बच्चों के साथ खड़े होकर खाना खिला रहे थे। बच्चे भोजन कर रहे थे। विद्यालय में कुल नामांकित बच्चे 401 जबकि बच्चों उपस्थित 210 रसोईया के द्वारा अंडा को उबाला जा रहा था। मध्य विद्यालय जमुहार मे बच्चे भोजन कर लिए थे। बच्चे से पूछे जाने पर बताया कि हम लोगों को अंडा नहीं मिला है। अंडा के जगह पर केला दिया गया है। मध्य विद्यालय जोगर में भी बच्चों को अंडा के जगह पर केला ही दिया गया। उक्त विद्यालय में 250 बच्चा के नामांकित है जबकि उपस्थित 150 थी। इसी प्रकार मध्य विद्यालय मझीआवां में 7 शिक्षक में छ: शिक्षक उपस्थित थे। शिक्षक अपने क्लास में बच्चों को पढ़ा रहे थे। उक्त विद्यालय में 260 बच्चे नामांकित है जबकि उपस्थित 59 थी। विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजकुमार से बातचीत किया तो उन्होंने बताया कि सरकार का कोई चिट्ठी हमें नहीं मिली है कि अंडा देना है। उक्त विद्यालय में बच्चों से जब बात किया तो उन लोगों ने कहा कि हम लोग को अंडा नहीं मिलता है फल मिलता है। इधर प्रधानाध्यापक से पूछा गया की उपस्थित उन्होंने कहा कि पता नहीं है की लगन का समय है। अगर उक्त विद्यालय के दूसरे तीसरे दिन की उपस्थिति की बात करें तो 110, 115 से 125 तक है। इससे साफ जाहिर होता है कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक कितना अनियमित कर रहे हैं। मध्य विद्यालय सिमरवार में शिक्षक सभी उपस्थित थे बच्चों का नामांकन 200 है परंतु उपस्थित 55 थी। यहां भी अंडा नहीं दिया गया बच्चों को केला मिल रहा था। बताते चले कि मोहनपुर प्रखंड में प्राथमिक विद्यालय की संख्या 89 है मध्य विद्यालय की संख्या 76 है कुल विद्यालय की संख्या 165 है जहां पर भोजन बनाया जाता है। शुक्रवार को सरकार के आदेश का यहां पूरी तरह से उल्लंघन किया गया जा रहा। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रखंड के औसत आकडा निकाला जाए तो 5 प्रतिशत विद्यालय में अंडा दिया जा रहा है। शेष सभी विद्यालय में केला का वितरण किया जाता है। सरकार बच्चों को अंडा देने का एक ही उद्देश्य है कि उन्हें पौष्टिक आहार मिलेगा और बच्चे मानसिक रूप से विकसित होगे। लेकिन शिक्षक केला खिलाकर बच्चों को रखना चाहते हैं। इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अशोक कुमार से दूरभाष पर बातचीत हुआ तो उन्होंने कहा कि पूरे प्रखंड के सभी शिक्षक के ग्रुप में सरकार को जो चिट्ठी आई है, वह भेज दिया गया है और सभी जगह विद्यालय में अंडा मिलना चाहिए जो बच्चे नहीं खाते हैं, उसी बच्चे के लिए फल देना है। सभी को नही।
एमडीएम प्रभारी महेंद्र प्रसाद ने बताया कि मोहनपुर प्रखंड के प्रधानाध्यापक या प्रभारी शिक्षक मनमाने ढंग से और सरकार के पात्र को नहीं मानते हुए फल जो वितरण कर रहे हैं यह गलत है। यह जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि यह बात सत्य है कि 95 प्रतिशत विद्यालय में अंडा नहीं देकर फल में केवल केला ही दिया जाता है।





