
50 करोड़ तक की निविदाओं में स्थानीय संवेदकों की अनदेखी का आरोप, मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
बिहार सरकार द्वारा 50 करोड़ रुपये तक की निविदाओं में राज्य के स्थानीय संवेदकों को प्राथमिकता देने के निर्णय के बावजूद विभागीय स्तर पर इस नीति को निष्प्रभावी किए जाने का मामला सामने आया है। बक्सर सांसद सुधाकर सिंह का आरोप है कि पथ निर्माण विभाग द्वारा कई छोटी-छोटी योजनाओं और सड़कों को एक साथ जोड़कर 100 से 150 करोड़ रुपये तक की बड़ी निविदाएँ निकाली जा रही हैं, जिससे बिहार के स्थानीय संवेदक प्रतियोगिता से बाहर हो रहे हैं।
उनके द्वारा बताया गया है कि जिन योजनाओं की वास्तविक लागत 30 से 40 करोड़ रुपये के बीच है, उन्हें 4-5 अन्य योजनाओं के साथ जोड़कर निविदा की राशि कृत्रिम रूप से बढ़ाई जा रही है। इससे राज्य के स्थानीय संवेदकों को भाग लेने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जबकि बाहरी राज्यों विशेषकर मुंबई और गुजरात की बड़ी कंपनियों को इसका लाभ मिल रहा है।
इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए सांसद सुधाकर सिंह के द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि कुछ विभागीय अधिकारी सरकार की मंशा के विपरीत कार्य कर रहे हैं और स्थानीय संवेदकों के अधिकारों की अनदेखी कर रहे हैं।
पत्र में मांग की गई है कि निविदाओं के कृत्रिम समूहीकरण की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि बिहार के स्थानीय संवेदकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके और सरकार की घोषित नीति का सही तरीके से पालन हो।
